उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद स्थित JS University को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द करने और उसके शैक्षणिक व प्रशासनिक संचालन को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा को सौंपने के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन और स्टाफ में राहत का माहौल है, वहीं छात्रों के बीच एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ गई है।

क्या था पूरा मामला?
JS University के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत 21 मार्च 2025 को जारी एक नोटिस से हुई थी। राज्य सरकार ने कथित अनियमितताओं और फर्जी डिग्री मामलों को आधार बनाते हुए विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त कर दी थी। साथ ही विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को अस्थायी रूप से डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के माध्यम से संचालित करने का आदेश जारी किया गया था। इसके लिए एक विशेष कमेटी का भी गठन किया गया था।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
JS University की ओर से कुलपति डॉ. गीता यादव ने इस आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। विश्वविद्यालय की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने जांच प्रक्रिया, नोटिस जारी करने के तरीके और प्रशासनिक निर्णयों पर कई सवाल उठाए।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने सरकार का पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति विवेक शरण की पीठ ने जांच प्रक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड पर प्रथम दृष्टया असंतोष जताया।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले का अंतिम निर्णय सभी पक्षों के जवाब दाखिल होने के बाद ही किया जा सकता है। फिलहाल विश्वविद्यालय के खिलाफ जारी आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जाती है। साथ ही राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, जिसके बाद याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर देने की अनुमति दी गई है।
UP में JS University की मान्यता रद्द, 15 हजार छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार का बड़ा फैसला
छात्रों का भविष्य फिर अधर में
इस आदेश का सबसे बड़ा असर विश्वविद्यालय में पढ़ रहे सैकड़ों छात्रों पर पड़ा है। मान्यता रद्द होने के बाद छात्रों को उम्मीद थी कि आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध होने पर समय पर परीक्षाएं और परिणाम जारी होंगे। लेकिन हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब उन्हें फिर से अदालत के अगले फैसले का इंतजार करना पड़ेगा।
छात्रों में बढ़ी चिंता
कई छात्र-छात्राएं इस फैसले से निराश हैं। उनका कहना है कि कानूनी लड़ाई के चलते उनका करियर बार-बार अनिश्चितता में फंस रहा है। वे चाहते हैं कि अदालत जल्द से जल्द ऐसा निर्णय दे, जिससे छात्रों के हित सुरक्षित रह सकें।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट ने साफ किया है कि यह आदेश केवल अंतरिम है। राज्य सरकार के जवाबी हलफनामे और विश्वविद्यालय के प्रत्युत्तर के बाद ही मामले का अंतिम निपटारा होगा। तब तक JS University पर सरकार द्वारा लगाया गया आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।











